
MERA SCHOOL
बात उन दिनों की है जब मैं गांव में बस खेलता था। वो दोर ऐसा था कि गाँव में बिजली भी नहीं थी बस चारोँ और अँधेरा ही अँधेरा था। मैं बस चांद की रोशनी में ही खेलता था, नहीं तो छुपा-छुपाई का खेल बड़ा मस्त था, जिसका मैं पूरा आनंद लेता था।
मैं बस लगभाग 5 साल का हो गया था और मेरे पिताजी मुझे गांव की ही प्राइमरी पाठशाला में एडमिशन दिलवाने के लिए गए थे। उस समय 5 साल से कम उम्र के बच्चों का स्कूल में एडमिशन नहीं हुआ था।
मास्टर जी ने अपने हाथ की 5 उंगलियों से मेरे कान को नापा और मेरा एडमिशन कर लिया और मेरा नाम जगपाल सिंह रखा।
स्कूल में बस दो कमरे थे और दो ही पेड़। हम बस टाट की पत्ती पर बैठकर पढ़ाई करते थे छोटी क्लास के बच्चे अपने घर से काटा या बोरी ले जाया करते बैठा करते थे।
मेरे स्कूल में श्री शिवचरण, श्री रामफल सिंह, श्री नत्थू सिंह, श्री हरपाल सिंह ये सभी शिक्षक गण विद्यामान थे जिनसे मुझे प्रारंभिक शिक्षा मिल रही थी।
मेरे बहुत सारे दोस्त बने, लेकिन मॉनिटर मैं ही था सभी पांच साल में।
मेरे सभी शिक्षक मुझे बहुत प्यार करते थे जिनसे सबसे ज्यादा श्री रामफल सिंह प्यार करते थे और उनका पढ़ाना तो गजब था ही।
मैं स्कूल में हमेशा एक ही भजन गाया करता था चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है। सभी शिक्षक मुझे बहुत पसंद करते थे। मुझे सभी का बहुत प्यार मिला। स्कूल में होने वाले सभी फंक्शन में मैं बढ़चढ कर भाग लेता था।
स्कूल में कुछ शरारती दोस्त भी थे जिनमें कुछ लड़कियां भी थीं। एक लड़की ने तो अपने दोस्त के कहने पर झूठा बोलकर मुझे गुरु जी से पिटवा दिया था कि जगपाल मुझे छेड़ रहा था | वे सभी लड़कियाँ निकम्मी थी और अपना सभी रुका हुआ काम मेरी कॉपी लेकर ही पूरी करती थी। अगर मैं कॉपी नहीं देता था तो गुरु जी से डांट लगवाकर ले लेती थी।
जो भी हो वो दिन बहुत अच्छे थे।
कहानी अभी आगे भी जारी रहेगी। जुड़े रहिए जहरीला म्यूजिक से |
ब्लॉग पढने के लिए धन्यवाद।
आपको ये मेरी कहानी कैसी लगी मुझे जरूर कमेंट करें।

बहुत मजेदार और दिलचस्प 🤩