बिल्कुल नई खुशी और नई उम्मीद के साथ
कक्षा 5 के बाद

कहानी को आगे बढ़ाते हुए… 5वीं क्लास पास करने के बाद जैसे ही कक्षा 6 में एडमिशन लेने की बात हुई तो मन में एक खुशी भी थी और एक गम भी। ख़ुशी इस बात की, कि अब मैं नए स्कूल में पढ़ने जाऊँगा, और गम इस बात का था, कि वह स्कूल अब मेरे गाँव से 2 किलोमीटर दूर है।
इसी खुशी और गम को मन में लेकर मेरा एडमिशन अब छठी क्लास में हो गया और पढ़ाई शुरू हो गई। नई पढ़ाई, नई जगह, नए लोग, नए दोस्त, सब कुछ नया था।
इसमें मजा भी आ रहा था और डर भी था, क्योंकि टीचर पढ़ाते कम थे और बोर्ड पर ज्यादा लिखते थे और हम बस उसको कॉपी पर लिखते थे और पीरियड खत्म।
टीचर से कभी कुछ कहने की हिम्मत नहीं होती थी, क्योंकि वो सभी टीचर किताब या गाइड हाथ में लेकर पढ़ाते थे। वो लिखवाते, हम लिखते, लेकिन समझ में कुछ नहीं आता।
खैर जो भी, आदरणीय शिक्षकों ने हमें पढ़ाया उसके लिए उनका दिल से धन्यवाद, क्योंकि आज हम जो हैं उनकी वजह से ही हैं।
अश्चर्य जब हुआ जब अंग्रेजी के बारे में सुना। ये क्या आफत थी. हमें पहली बार पता चला कि ये भी एक भाषा है। मैं छठी क्लास में एबीसीडी सीख रहा था और आज तो पढ़ाई इंग्लिश से ही शुरू होती है।
केवल एक शिक्षक ही ऐसे थे जिनका पढ़ाया हुआ अच्छे से समझ आता था, वो गणित के अध्यापक थे। मैं उनका बहुत सम्मान करता था। उनकी पढाई ऐसी थी कि कभी ट्यूशन की जरूरत महसूस नहीं हुई। और वैसे भी मेरी ऐसी हालत नहीं थी कि मैं कहीं ट्यूशन पढ़ सकूं। बस जो स्कूल में पढ़ता था वही काफी था | वही टाट पट्टी वहां भी मौजूद थी बैठने के लिए लेकिन अब हमें कट्टा या टाट पट्टी घर से लेकर नहीं जाना पड़ता था। पढाई का सफर चल रहा था और समय धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था।
बस आगे की कहानी के लिए जुड़े रहिए ज़हरीला म्यूजिक से।
पढने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। मिलते हैं जल्दी ही आगे की कहानी लेकर |
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